हरियाणा के सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर, गुरुग्राम में परेशान दिखे मरीज

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हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डॉक्टर्स आज अपनी मांगों को लेकर एक दिन की हड़ताल पर बैठ गए। इसका असर दिल्ली से सटे साइबर सिटी गुरुग्राम में भी देखने को मिला। सेक्टर 10 सिविल हॉस्पिटल में सुबह 9 बजे से ओपीडी सेवाएं शुरू होती हैं लेकिन डॉक्टर्स की हड़ताल के चलते ओपीडी सेवाएं बाधित रहीं जिसका खामियाजा सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को उठाना पड़ा और इलाज के लिए निजी अस्पतालों की रुख करना पड़ा।

गुरुग्राम के सिविल हॉस्पिटल में डॉक्टर्स ही डॉक्टर को बेशर्म बोलते सुने गए। दरअसल, प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले 3000 डॉक्टर्स आज अपनी मांगों को लेकर एक दिन की हड़ताल पर बैठ गए। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर्स की हड़ताल का असर गुरुग्राम के सरकारी अस्पतालों में भी देखने को मिला। सेक्टर 10 स्थित सिविल अस्पताल में सुबह 9 बजे जहां मरीजों के इलाज के लिए ओपीडी शुरू होती है उसी अस्पताल में हड़ताल पर बैठे डॉक्टर्स दूसरे डॉक्टर्स को बेशर्म तक बोलने लगे। हड़ताल पर बैठे डॉक्टर्स उन डॉक्टर्स को बेशर्म बोल रहे थे जो हड़ताल में शामिल नहीं हुए।

गुरुग्राम के सरकारी अस्पताल में हड़ताल पर बैठे डॉक्टर्स की मानें तो आज केवल एक दिन हड़ताल है और ओपीडी सेवाओं के अलावा सभी सेवाएं जैसे कि वैक्सीनेशन और इमरजेंसी सेवाएं सुचारू रूप से चल रही हैं। हड़ताल पर बैठे डॉक्टर्स नहीं चाहते कि सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले किसी भी मरीज को परेशानी का सामना करना पड़े लेकिन डॉक्टर्स को अपनी मांगें मनवाने के लिए ऐसा करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि स्वास्थ विभाग में डॉक्टर्स की भरी कमी है उनकी भर्ती की जाए, डॉयरेक्ट एसएमओ भर्ती ना की जाए जो डॉक्टर्स बिना अनुभव के डायरेक्ट एसएमओ बनेंगे तो कहीं ना कहीं आने वाले समय में अस्पताल में चूक होती है तो उससे स्वास्थ विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठेंगे। उन्होंने फिलहाल 2 दिन का समय दिया जा रहा है अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 14 जनवरी को सभी सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ संबंधी सेवाएं पूर्ण रूप से बंद कर दी जाएंगी

ओपीडी सेवा बाधित होने के कारण इलाज के लिए मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर ओपीडी कार्ड तो मरीजों का बन गया लेकिन डॉक्टर्स के हड़ताल पर बैठे होने के कारण उनको इलाज नहीं मिल पाया और कुछ मरीजों को तो निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ा। देखना यह होगा कि सरकार डॉक्टर्स की मांगों को मानती है या फिर 2 दिन के बाद सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ संबंधी सभी सेवाएं पूर्ण रूप से ठप हो जाएंगी।