सोहना अनाज मंडी में किसान हुए इस कीमत पर बाजरा बेचने को मजबूर

इस वक्त सोहना अनाज मंडी मैं किसान बेहद परेशान नजर आ रहे हैं जी हां सोहना की अनाज मंडी में बाजरे की सरकारी खरीद 3 दिन के बाद भी नहीं शुरू हुई जिसकी वजह से किसान बहुत ज्यादा परेशान नजर आए किसानों ने कहा कि मजबूरी में हमने अपनी फसल निजी कंपनियों को सरकारी कीमत से कम दाम में बेचने को मजबूर किया गया है।

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कम दाम में बेचने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है 1 अक्टूबर से प्रदेश की सभी मंडियों में बाजरे की सरकारी खरीद शुरू होना थी जो कि अब तक शुरू नहीं हुई है। सब जगह की मंडियों में बाजरे की फसल की सरकारी खरीद शुरू करने की राज्य सरकार ने आदेश जारी किए थे। जिसमें बाजरे की सहकारी मूल्य ₹1650 रखा गया था और साथ ही सरकार ने ₹600 प्रति कुंटल किसानों को ऑनलाइन उनके खाते में जमा करने को कहा था

मंडी में बैठे आढ़ती को किसान किसान ने बाजरे को 1650 रुपए में सरकारी खरीद के अनुसार लेने को कहा था सोना अनाज मंडी में हैफेड को बाजरे की खरीद के लिए लगा दिया गया है लेकिन परेशानी की बात यह है कि 3 दिन के बाद भी कोई भी सरकारी एजेंसी अनाज मंडी में बाजरे की खरीद के लिए अब तक नहीं पहुंची है।

खराब धाम में बाजरा बेचने के लिए किसान हुए मजबूर

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सरकारी एजेंसियों के मंडी में ना पहुंचने से क्षेत्र के किसान काफी परेशान है किसान अपनी फसल आरतियां को बेचने के लिए मजबूर है किसान को आढ़तियों को अपनी फसल भेजने के कारण ढाई सौ से 300 का नुकसान हो रहा है किसान भगत सिंह कहते हैं।

कि किसानों ने बाजरे को 20 से 5 दिन पहले लाकर ही अपने घरों में रख लिया था अभी तक 40 से 50 हुई थी किसानों का बाजरा तो खेतों में ही पड़ा है किसानो का आरोप है कि आढ़ती उनका बाजरा सरकारी दाम के अनुसार ₹1650 कुंटल नहीं खरीद रहे हैं इनकी वजह से उनको खराब दामों में बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा।