गुरुग्राम, फरीदाबाद सहित हरियाणा में 100 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट की निगरानी खुद करेगी सरकार

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हरियाणा में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाई जा रही अपनी मुहिम के आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार ने अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं की मानीटरिंग मुख्यालय से कराने का निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने सभी मंडलायुक्त और जिला उपायुक्तों से उनके क्षेत्रों में चल रहे ऐसे तमाम प्रोजेक्ट की रिपोर्ट मांगी है।

प्रदेश सरकार हालांकि दिसंबर माह में भी ऐसी रिपोर्ट मांग चुकी है, लेकिन लापरवाह अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बृहस्पतिवार को एक आदेश जारी कर कहा कि अगले दो दिनों के भीतर 100 करोड़ से ऊपर की विकास परियोजनाओं की जानकारी नहीं देने वाले जिलों की कार्यप्रणाली को संदिग्ध माना जाएगा।

बताया जाता है कि 100 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं वाले विभागों में शहरी निकाय, पीडब्ल्यूडी, मार्केटिंग बोर्ड और बिजली विभाग प्रमुख हैं। शहरी निकायों की हालत काफी खराब है। नगर निगमों के पास भुगतान के लिए पैसे नहीं हैं। उन्हें अपने संसाधनों के जरिए पैसे जुटाकर खर्च करने के निर्देश सरकार की तरफ से पहले ही दिए जा चुके हैं।

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इन परियोजनाओं के भुगतान के लिए जब शहरी निकायों अथवा अन्य विभागों द्वारा प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजे जाते हैं तो उन्हें वापस इस टिप्पणी के साथ लौटा दिया जाता है कि भुगतान का इंतजाम खुद करें। इस वजह से काफी परियोजनाएं या तो धीमी पड़ गई अथवा बंद होने की स्थिति में हैं। प्रदेश सरकार यह देखना चाहती है कि किस जिले में कितनी बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं और उनका स्टेटस क्या है। बताया जाता है कि सरकार इन परियोजनाओं में तेजी लाने के साथ ही बजट का अतिरिक्त इंतजाम भी कर सकती है।