गुरुग्राम में फर्जी IPS अधिकारी के चक्कर में फंसकर कंस्ट्रक्शन कंपनी ने गंवा दिए 37 करोड़ रुपये

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गुरुग्राम में शख्स ने खुद को एनएसजी मानेसर में तैनात आईपीएस अधिकारी बताकर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी से 37 करोड़ रुपये ठग लिए. फर्जी अधिकारी ने कंपनी को एनएसजी परिसर में निर्माण काम देने के नाम पर ठगी की.

दिल्ली से सटे और एनसीआर में आने वाले गुरुग्राम में ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां शख्स ने खुद को एनएसजी मानेसर में तैनात आईपीएस अधिकारी बताकर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी से 37 करोड़ रुपये ठग लिए. इस फर्जी अधिकारी ने कंस्ट्रक्शन कंपनी को एनएसजी परिसर के अंदर अलग-अलग निर्माण काम देने के नाम पर अपने खाते में पैसे जमा कराए थे. इस दौरान कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े लोगों को विश्वास दिलाने के लिए आरोपी ने अपना अधिकारी होने का फर्जी पहचान पत्र दिखाया और फिर ठगी को अंजाम दिया.

आरोपी ने सड़क, एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), एक गोदाम और एक आवासीय परिसर के निर्माण के लिए शिकायतकर्ता को आवंटन पत्र जारी करने के लिए एनएसजी का फर्जी मुहर भी बनाया. साथ ही टेंडर क्लॉज के अनुसार आवंटित हर काम के लिए कंपनी से पैसे मांगे. बताया जा रहा है कि आरोपी ने ‘ऑफिस ऑफ जीसी (गैरिसन) स्टेशन मुख्यालय, एनएसजी, मानेसर’ के नाम से एक बैंक खाता भी खोला था और इस खाते के माध्यम से सभी लेनदेन करता था.


कंस्ट्रक्शन कंपनी वाईएफसी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक और शिकायतकर्ता देवेंद्र यादव ने बताया कि आरोपी प्रवीन यादव से उसकी मुलाकात जून 2021 में पहली बार एनएसजी मानेसर कैंपस में हुई थी. उसने खुद को आईपीएस सोबीर जाखड़ बताया और कहा कि वह एनएसजी के मानेसर कैंपस में बतौर ग्रुप कमांडर तैनात है. आरोपी ने अपना आई कार्ड भी दिखाया था, जिस पर ग्रुप कमांडर वर्क्स लिखा हुआ था.


देवेंद्र यादव के मुताबिक आरोपी ने कहा कि यहां पर कई सारे काम होने वाले हैं और वो कांट्रेक्ट उसे दिला देगा. इसके बाद पहला कोटेशन 12 जून, 2021 को एनएसजी परिसर के अंदर साढ़े 16.56 किमी लंबी पेरिफेरल रोड बनाने का मिला. शिकायतकर्ता को 23 जुलाई को एसटीपी बनाने के लिए एक और पत्र मिला. 2 सितंबर को उसे एनएसजी परिसर के अंदर गोदाम बनाने का पत्र मिला. इस दौरान उसने अरनेस्ट राशि के तौर पर 36 करोड़ 84 लाख रुपये खाते में जमा करा लिए.