दिल्ली-NCR में 5000+ कार मालिकों के सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा 2.66 लाख गाड़ियों पर कार्रवाई

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसमें वाहनों का प्रमुख योगदान है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकारें इस चुनौती से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण (PUC) सर्टिफिकेट की जांच तेज कर दी गई है। बीते दिनों निर्माण कार्य और डीजल जनरेटर के उपयोग पर भी अस्थायी रोक लगाई गई।

5200 कार मालिकों पर हुआ सर्वे: जागरूकता की कमी

एक हालिया सर्वे में पार्क प्लस रिसर्च लैब्स ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। दिल्ली-एनसीआर के 5200 कार मालिकों से बातचीत में पाया गया कि 63% लोग अपने PUC सर्टिफिकेट की स्थिति से अनजान हैं।

  • 11% को नहीं पता PUC सर्टिफिकेट क्या है: इनमें से 11% कार मालिकों को यह भी नहीं पता कि PUC सर्टिफिकेट होता क्या है और इसे कहां से रिन्यू किया जा सकता है।
  • 27% को कोई फर्क नहीं पड़ता: सर्वे में शामिल 27% कार मालिकों ने स्वीकार किया कि उन्हें यह जानकारी है कि नॉन-सर्टिफाइड PUC कारें अधिक प्रदूषण फैलाती हैं, लेकिन इस पर उन्होंने कोई चिंता नहीं जताई।

क्या है पीयूसी सर्टिफिकेट की अनदेखी का असर?

रिपोर्ट में पाया गया कि 27% कार मालिकों को यह जानकारी होने के बावजूद कोई फर्क नहीं पड़ता कि बिना सर्टिफिकेट वाली गाड़ियां अधिक प्रदूषण फैलाती हैं। यह निष्कर्ष पर्यावरण और जागरूकता की कमी को उजागर करता है।

बिना पीयूसी सर्टिफिकेट पर भारी जुर्माना

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट के वाहन चलाने पर 10,000 रुपये तक का चालान हो सकता है। पहली बार पकड़े जाने पर 1,000 रुपये और दूसरी बार 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।

50 दिनों में 2.66 लाख वाहनों पर कार्रवाई

अक्टूबर 15 से दिसंबर 9, 2024 तक दिल्ली में 2.66 लाख वाहन चालकों पर जुर्माना लगाया गया। ये सभी गाड़ियां ग्रैप 3 और 4 नियमों का उल्लंघन कर रही थीं।

जागरूकता बढ़ाने के लिए पीयूसी कैंप

पार्क प्लस के सीईओ अमित लाखोटिया ने बताया कि उनकी कंपनी ने जागरूकता बढ़ाने के लिए जगह-जगह पीयूसी कैंप लगाए हैं। यहां कार मालिक अपने वाहनों की जांच करवाकर तुरंत पीयूसी सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं।

प्रदूषण कम करने की दिशा में कदम जरूरी

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सख्त नियमों के साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में हर वाहन मालिक की जिम्मेदारी अहम है।