दिल्ली वाला पार्किंग चक्रव्यूह’!आनंद विहार स्टेशन पर पार्किंग के नाम पर हो रही सीधी लूट!

दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए सस्ती सामान्य पार्किंग की सुविधा तो है, लेकिन सही जानकारी के अभाव में लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। पार्किंग बोर्ड पर लिखा है ‘सामान्य पार्किंग – काली-पीली टैक्सी’, जिससे लोग यही समझते हैं कि यह सुविधा केवल टैक्सी चालकों के लिए है।

🚗 20 रुपये में बाइक, 50 में कार… लेकिन किसे पता?

सामान्य पार्किंग में मात्र ₹20 में दो घंटे तक बाइक और ₹50 में कार खड़ी की जा सकती है। लेकिन बोर्ड ऐसी जगह लगाया गया है कि दिखाई ही नहीं देता। न कोई गाइडेंस, न कोई पर्ची कहां मिलेगी इसकी जानकारी। इस कारण अधिकतर लोग सीधे पिक एंड ड्रॉप लेन में चले जाते हैं।

💸 पिक एंड ड्रॉप लेन बना ‘कमाई का जाल’

जो लोग सामान्य पार्किंग नहीं ढूंढ पाते, वे मजबूरी में पिक एंड ड्रॉप लेन का उपयोग करते हैं। वहां शुल्क मिनटों के हिसाब से लिया जाता है:

  • पहले 10 मिनट: निःशुल्क (केवल निजी वाहन के लिए)
  • 11 से 17 मिनट: ₹50
  • 18 से 32 मिनट: ₹200
  • 32 मिनट से ज्यादा: ₹500

कैब चालकों को तो शुरुआत से ही ₹30 चुकाना पड़ता है।

🧾 टोल जैसे 5 काउंटर, लेकिन सिर्फ पिक एंड ड्रॉप की पर्ची

स्टेशन के एंट्री पॉइंट पर बने 5 काउंटर सिर्फ पिक एंड ड्रॉप की पर्ची देते हैं। सामान्य पार्किंग की पर्ची कहां से मिलेगी, इसका कोई उल्लेख नहीं है। यह भी नहीं लिखा है कि सामान्य पार्किंग में जाने के लिए पहले पिक एंड ड्रॉप की पर्ची सरेंडर करनी होती है।

🤷‍♂️ रेलवे और पार्किंग संचालक दोनों की लापरवाही

पार्किंग प्रबंधक पप्पू सिंह ने माना कि बोर्ड को लेकर भ्रम है और इसमें सुधार की जरूरत है। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि “जो पूछते हैं, उन्हें जानकारी दी जाती है।” यानी जो नहीं पूछता, वो भारी शुल्क चुकाने को मजबूर!

रेलवे अधिकारी भी मानते हैं कि जानकारी में कमी है और उन्होंने पूरे मामले की जांच की बात कही है।

🚦 हर दिन हजारों वाहन पहुंचते हैं स्टेशन

  • ऑटो: 3,500
  • कैब: 2,000
  • निजी कार: 1,000
  • बाइक: 700

इस भीड़ में अगर बोर्ड और पर्ची सिस्टम स्पष्ट नहीं है तो यात्रियों का फंसना तय है।

🔍 निष्कर्ष: सस्ती सुविधा, लेकिन सिस्टम फेल

आनंद विहार स्टेशन पर सस्ती पार्किंग सुविधा जरूर है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ उन्हीं को मिल रहा है जो पहले से जानते हैं या बार-बार स्टेशन आते हैं। आम यात्रियों के लिए यह भ्रम और भारी शुल्क का खेल बन गया है। रेलवे को अब जागना होगा और बोर्ड, पर्ची और गाइडेंस सिस्टम में सुधार करना ही होगा।

🟡 सुझाव: अगर आप ट्रेन पकड़ने जा रहे हैं और 10 मिनट से ज्यादा रुकने की सोच रहे हैं, तो पहले सामान्य पार्किंग के बारे में पूछ लें — नहीं तो आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है सफर!