दिल्ली मेट्रो एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। देश में पहली बार 3 कोच वाली ट्रेन के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया मेट्रो कॉरिडोर शुरू होने जा रहा है। यह कॉरिडोर लाजपत नगर से साकेत जी ब्लॉक तक फैला होगा और कुल 8 किलोमीटर लंबा होगा। इसे दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के तहत विकसित किया जा रहा है।
कम दूरी की यात्रा के लिए आदर्श
इस 3 कोच वाली ट्रेन को खासतौर पर उन यात्रियों के लिए बनाया गया है जो कम दूरी की यात्रा करते हैं, लेकिन मेट्रो पर कई बार निर्भर रहते हैं। इसकी डिजाइन न केवल कॉम्पैक्ट होगी, बल्कि ऊर्जा की खपत भी कम होगी, जिससे यह पर्यावरण के लिए भी मुफीद रहेगा।
घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बड़ी राहत
यह कॉरिडोर दक्षिण दिल्ली से मध्य दिल्ली तक के यात्रियों के लिए ‘अंतिम माइल कनेक्टिविटी’ को बेहतर बनाएगा। इसका उद्देश्य प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर भीड़ को कम करना और यात्रियों के सफर को सुगम बनाना है। इस रूट से हजारों यात्रियों को फायदा होगा और यात्रा का समय भी घटेगा।
शहर को मिलेगी नई “गोल्डन लाइन”
लाजपत नगर से साकेत जी ब्लॉक तक यह लाइन दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में दूसरी सबसे छोटी लाइन होगी। दिलचस्प बात यह है कि साकेत जी ब्लॉक स्टेशन को “गोल्डन लाइन” के नाम से भी जाना जाएगा, जो एयरपोर्ट से इंटरचेंज सुविधा प्रदान करेगा।
प्रत्येक ट्रेन में 900 यात्रियों की क्षमता
इस ट्रेन के हर कोच में लगभग 300 यात्रियों के बैठने और खड़े होने की व्यवस्था होगी, यानी कुल ट्रेन क्षमता 900 यात्रियों की होगी। इस मॉडल को आर्थिक रूप से भी टिकाऊ माना जा रहा है, जो ऑपरेशन कॉस्ट को कम करने में मदद करेगा।
2029 तक पूरा होने की उम्मीद
इस मेट्रो कॉरिडोर के 2029 तक चालू होने की उम्मीद है। इसका निर्माण यात्रियों की ज़रूरतों और व्यवहार को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, जिससे दिल्ली की शहरी परिवहन प्रणाली को मजबूती मिलेगी।
8 स्टेशनों वाला यह कॉरिडोर इन क्षेत्रों को जोड़ेगा
- लाजपत नगर – पिंक और वायलेट लाइनों से इंटरचेंज
- एंड्रयूज गंज
- ग्रेटर कैलाश-1 – स्थानीय रिहायशी इलाकों के लिए
- चिराग दिल्ली – मैजेंटा लाइन से इंटरचेंज
- पुष्पा भवन – सरकारी दफ्तर और कॉलोनियों को जोड़ता
- साकेत कोर्ट
- पुष्पा विहार – सेक्टर 1, 3, 4 और 7 को फायदा
- साकेत जी ब्लॉक – गोल्डन लाइन से एयरपोर्ट कनेक्टिविटी
निष्कर्ष:
दिल्ली मेट्रो का यह नया कॉरिडोर राजधानी के शहरी परिवहन ढांचे में गेमचेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि स्मार्ट सिटी के सपनों को हकीकत में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम होगा।