क्या लोगों को सिर्फ लॉलीपॉप दिखाते हैं, 24 घंटे पानी के वादे पर दिल्ली हाईकोर्ट की केजरीवाल सरकार को फटकार

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दिल्ली में मच्छरों के प्रजनन और मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार से संबंधित एक स्वत: संज्ञान याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा, “या आप उनके बारे में कभी गंभीर नहीं हैं? ये सभी लॉलीपॉप हैं जो आप लोगों को दिखाते हैं.” अदालत को पहले बताया गया था कि दिल्ली में पानी की आपूर्ति भी मच्छर जनित रोगों के बढ़ने के लिए एक अहम कारक है क्योंकि दिल्ली जल बोर्ड द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में कोई जलापूर्ति लाइन ठीक से नहीं बिछाई गई है.

दिल्ली सरकार से यह पूछते हुए कि क्या वह अपने चुनावी वादों को भूल गई है, उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि “आपके घर में 24 घंटे पानी की आपूर्ति” और “नल से पीने का पानी” के वादे हर बार चुनाव होने पर किए जाते हैं. दिल्ली में मच्छरों के प्रजनन और मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार से संबंधित एक स्वत: संज्ञान याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा, “या आप उनके बारे में कभी गंभीर नहीं हैं? ये सभी लॉलीपॉप हैं जो आप लोगों को दिखाते हैं.”

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अदालत को पहले बताया गया था कि दिल्ली में पानी की आपूर्ति भी मच्छर जनित रोगों के बढ़ने के लिए एक अहम कारक है क्योंकि दिल्ली जल बोर्ड द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में कोई जलापूर्ति लाइन ठीक से नहीं बिछाई गई है. दक्षिण और उत्तरी एमसीडी की ओर से पेश अधिवक्ता दिव्य प्रकाश पांडे ने कहा, “जहां 24 घंटे पानी की आपूर्ति नहीं है, वहां लोग पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं. वे अपने बर्तनों और अन्य चीजों में पानी इकट्ठा करते हैं और रखते हैं. तो इस वजह से भी मच्छरों के प्रजनन में मदद मिलती है… अगर 4-5 दिनों के बाद टैंकर आता है.”


इसके जवाब में दिल्ली जल बोर्ड की ओर से अधिवक्ता साक्षी पोपली ने कहा कि सभी क्षेत्रों में 24 घंटे आपूर्ति उपलब्ध नहीं है और कुछ स्थानों पर टैंकरों के माध्यम से पानी भेजा जाता है. पोपली ने कहा, “एक शेड्यूल है जिसका पालन किया जा रहा है.” यह सवाल करते हुए कि हर जगह पानी की लाइनें क्यों नहीं बिछाई गई हैं, अदालत ने कहा कि वहां सीमित क्षेत्रों के लिए पानी की आपूर्ति की जा सकती है. अदालत ने पूछा, “आप पानी की लाइनों के माध्यम से जल की आपूर्ति करने के बजाए टैंकरों से आपूर्ति क्यों कर रहे हैं.”

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अदालत को शुक्रवार को यह भी बताया गया कि मच्छरों के प्रजनन के मुद्दे से निपटने के लिए निगमों द्वारा दो टास्क फोर्स का गठन किया गया है – एक मुख्यालय स्तर पर और दूसरा जोनल स्तर पर. अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि अधिकारियों की एक बैठक 21 जनवरी को होनी


इसके साथ ही कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि मच्छर जनित बीमारियों के खतरे को नियंत्रित करने के लिए दैनिक आधार पर अभियान और कार्रवाई शुरू करना नगर निकायों का कर्तव्य है. अदालत ने कहा कि इसे विशेष महीनों के दौरान कदम उठाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता है. उच्च न्यायालय ने कहा कि शहर में जिन स्थानों पर मच्छरों का प्रकोप अधिक है, उन्हें भी नगर निगम और स्थानीय निकायों द्वारा पहचाना जाना चाहिए और इन क्षेत्रों में इस मुद्दे से निपटने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए.

न्यायालय ने कहा कि हालांकि मच्छर जनित रोग जैसे मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू मानसून के मौसम में बढ़ते हैं और ऐसे अन्य कारक भी हैं जो इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें घरों में एकत्र कचरा, इस्तेमाल किए गए टायर, टैंक आदि हैं जिनमें बारिश का पानी एकत्र हो जाता है.

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