दिल्ली के लोगों का हर साल हो रहा 715 करोड़ रुपये का नुकसान, कैसे बच सकता है ये पैसा?

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राजधानी दिल्ली में डिस्कॉम्स बिजली का डिस्ट्रीब्यूशन करती है. बिजली वितरण के लिए वो दिल्ली से सटे दादरी के पावर प्लांट से बिजली खरीदती है, लेकिन दादरी पावर प्लांट दिल्ली को महंगी बिजली बेचता है. इसकी वजह से दिल्ली के 66 लाख बिजली उपभोक्ताओं पर हर साल 715 करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिसके बाद अब डिस्कॉम्स दादरी से बिजली खरीदने को तैयार नहीं है.

दरअसल एनटीपीसी का दादरी पावर प्लांट दिल्ली को साढ़े 6 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली देता है. वहीं भारत सरकार के ही एक संस्थान सेकी यानी सोलर एनर्जी कॉपोरेशन ऑफ इंडिया से सिर्फ ढाई रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से दिल्ली के लिए बिजली मुहैया कराई जा रही है. अगर नुकसान को बात करे तो साल 2019 और 20 में डिस्कॉम्स ने दादरी-1 प्लांट से 1752 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी थी. यह बिजली दिल्ली को 6.58 रूपये प्रति यूनिट की दर से मिली, जिसके लिए दिल्ली को 1,153 करोड़ रूपये चुकाने पड़े थे.

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बता दे की अगर डिस्कॉम्स द्वारा इतनी ही भारत सरकार के ही संस्थान सेकी से हरित ऊर्जा खरीदी गई होती, तो इतनी बिजली के लिए दिल्ली को सिर्फ 438 करोड़ रूपये चुकाने पड़ते और उपभोक्ताओं को 715 करोड़ रूपये की बचत होती. महंगी बिजली खरीदने के नुकसान को देखते हुए दिल्ली डिस्कॉम्स ने नवंबर 2020 दादरी के प्लांट से बिजली नहीं खरीदी लेकिन फिर भी उन्हें हर महीने 35 करोड़ रुपए का भुगतान फिक्स्ड चार्जेस के तौर पर करना पड़ता है.