नोएडा से इन 32 शहरों के लिए हेलीकॉप्टर उड़ान होंगी, कॉरपोरेट्स, स्टूडेंट्स, मेडिकल और टूरिज्म के लिए वरदान बनेगा

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एक ओर जेवर में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हवाईअड्डा बनाया जा रहा है तो दूसरी तरफ नोएडा में देश के सबसे बड़े हेलीपोर्ट पर काम शुरू हो गया है। नोएडा हेलीपोर्ट (Noida Heliport Project) से दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 32 शहरों तक उड़ान भरी जाएंगी। करीब 5 वर्षों से इस परियोजना पर नोएडा विकास प्राधिकरण (Noida Authority) काम कर रहा था। नोएडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऋतु महेश्वरी (Ritu Maheshwari) ने बताया, “अब जल्दी ही इस हेलीपोर्ट का निर्माण शुरू होगा। ग्लोबल टेंडर के जरिए कंपनी की तलाश की जाएगी। यह हेलीपोर्ट कॉरपोरेट, टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा।”

500 किमी तक के पर्यटन केंद्र कवर होंगे

नोएडा अथॉरिटी से मिली जानकारी के मुताबिक 100 से 200 किलोमीटर के दायरे वाले शहरों मथुरा और आगरा तक नोएडा के लिए हेलीकॉप्टर मिलेंगे। आगरा पर्यटन का वैश्विक केंद्र है। मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली है। 300 से 400 किलोमीटर के दायरे वाले पर्यटन स्थल बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, जोशीमठ, रामपुर, मंडी और अजमेर हैं। नोएडा से इन शहरों के लिए रोजाना हेलीकॉप्टर उड़ान भरेंगे। इसी तरह 400 से 500 किलोमीटर दूरी वाले मनाली, बीकानेर, जोधपुर, डलहौजी और अयोध्या तक हेलीकॉप्टर उड़ेंगे।

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200 से 300 किमी वाले शहर सबसे ज्यादा

नोएडा से हेलीकॉप्टर सेवा के दायरे में सबसे ज्यादा शहर 200 से 300 किमी दायरे वाले हैं। इनमें मसूरी, यमुनोत्री, पंतनगर, नैनीताल, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, श्रीनगर, गोचर, नई टिहरी, शिमला, बद्दी, हरिद्वार, जयपुर, चंडीगढ़ और औली हैं।

औद्योगिक गतिविधियां और तेज होंगी

नोएडा हेलीपोर्ट का बड़ा फायदा गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और दिल्ली के बिजनेसमैन को होगा। इससे पूरे एनसीआर में कॉरपोरेट्स गतिविधियां बढ़ेंगी। अभी 500 किलोमीटर के दायरे में आवागमन करने के लिए बिजनेसमैन को ट्रेन या अपनी कारों पर निर्भर रहना पड़ता है। हेलीपोर्ट शुरू होने के बाद तमाम शहरों तक हवाई सफर खुल जाएगा। जिससे कामकाज दिनों की वजह घंटों में होने लगेंगे। बिजनेसमैन और कॉरपोरेट का वक्त बचेगा। गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद को बड़े अवसर मिलेंगे।

मेडिकल इमरजेंसी और टूरिज्म को बढ़ावा

यह हेलीपोर्ट मेडिकल इमरजेंसी और टूरिज्म को बड़ा बढ़ावा देगा। 500 किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले इलाकों से बेहद कम समय में आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान मरीजों को नोएडा और दिल्ली लाया जा सकेगा। नोएडा हेलीपोर्ट पर एयर एंबुलेंस की सुविधा विकसित की जाएगी। इसके अलावा टूरिज्म को सबसे बड़ा फायदा होने वाला है। उत्तराखंड और हिमाचल के पर्वतीय शहरों तक दिल्ली-एनसीआर सीधे वायु मार्ग जुड़ जाएगा। अभी 200 से 500 किलोमीटर का यह सफर तय करने में 24 घंटे तक का वक्त लगता है। हेलीपोर्ट इस सफर को 1 से 2 घंटे में समेट देगा।

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एजुकेशन सेक्टर को बड़ी उम्मीदें

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 10 यूनिवर्सिटी हैं। करीब 200 एजुकेशनल इंस्टीट्यूट हैं। गौतमबुद्ध नगर के एजुकेशन सेक्टर को नोएडा हेलीपोर्ट से बड़ा फायदा मिलेगा। बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर डॉ.हरिवंश चतुर्वेदी का कहना है, “छात्र-छात्राओं को कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में अपने घर पहुंचना होता है। परिवार अपने बच्चों को ज्यादा दूर भेजकर पढ़ाने से इसीलिए हिचकिचाते हैं, अगर कोई परेशानी होगी तो नोएडा, ग्रेटर नोएडा पहुंचने में वक्त लगेगा। जब यह हेलीपोर्ट सेवाएं देना शुरू कर देगा तो इमरजेंसी के वक्त संपर्क बेहद आसान हो जाएगा। निसंदेह इस प्रोजेक्ट से गौतमबुद्ध नगर के एजुकेशन सेक्टर को बड़ा फायदा होने वाला है।